ब्रह्मज्ञान

ब्रह्मज्ञान

By | 2018-01-20T17:04:21+00:00 December 26th, 2017|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

कहां से आया कहां जाणा, तनै ना राई का बेरा सै,
मूर्ख बन्दे बिन भजन जिन्दगी म्हं घोर अन्धेरा सै..!!टेक!!
सोग रोग भोग म्हं ,सारा यो जन्म खो लिया,
पाप की करली कमाई, धन #माल ढो लिया,
माया न इसा भलो लिया, बाकि कल्लू का फेरा सै..!!१!!
हरि के भजन बिन आखिर म्हं नर रोते देखे,
धन #माया बेटे पोते तै पापी कै भी होते देखे,
भुल म्ह पड़ बहोत सोते देखे, अंधकार का घेरा सै..!!२!!
काम क्रोध मद लोभ मोह, नै दुनिया सारी मारी,
इनका एक सरदार, #क्रोध है जालिम दुराचारी,
बाकि नरक के द्वार भारी, यो नर का रहन बसेरा सै..!!३!!
सतगुरू की दया तै ज्ञान की जोत जगती है,
मनजीत पहासौरिया ईश्वर की करता भगती है,
प्रबल हरी की #शक्ति है,मेरा तो कुछ समय का डेरा सै..!!४!!

रचनाकार :- पं मनजीत पहासौरिया

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