चिड़ियाँ

चिड़ियाँ

By | 2018-01-20T17:04:21+00:00 December 26th, 2017|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

चिड़ियाँ

चन्द्र मोहन किस्कु

उड़ती चिड़ियाँ को
जरूरत नहीं पड़ती
उड़ने के लिए लाईसेंस
उड़ के देश की सीमा को
पार करती है
उसे जरूरत नहीं पड़ती
पासपोर्टे और वीजा की.

वह राजा के घर की
गेँहु भी खाती है
और गरीब घर की
जूठन भी खाती है
ब्राह्मण के कुआँ की
पानी पिती है
और अछूत के घर में
भोजन करती है

हमलोग तो ऎेसा
कुछ भी न कर
पा रहे हैं
ऎेसा करने के लिए
चिड़ियाँ के जैसी
चौड़ा छाती
और
साहस की जरूरत है.

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