पत्र जो तुम पढ़ नही पाओगी

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पत्र जो तुम पढ़ नही पाओगी

विषयवस्तु- प्रेम पत्र

Letter for you *******

आज एक पत्र फिर लिखने के लिए बैठा हूँ, हा तुम्हें ही लिखूंगा । पर ये भी जानता हूं, तुम इसको समझ ही नही पाओगी। कही से इस पत्र में नजर पड़ भी गयी तो फिर मुझे मेसेज करोगी ‘ what is the meaning ‘ फिर मैं उसे अनुवाद करके, तुम्हें भेजूंगा और तुम कहोगी, वही जो हमेशा कहती हो, ‘ wow great, nice lines, I like it’
और मैं, यही सोचूंगा कि काश तुम इन पंक्तियों में छिपी ज़ज़्बातों को समझ के I like it के बजाय I like you बोल देती । पर नही यार, आज तक मैं यही नही समझ पाया कि तुम्हारें मन मेरे लिए क्या है , तो तुम उन मेरे उन पंक्तियों में छिपी भावो को कैसे पढ़ पाओगी, जो अनुवाद की वजह से अपना मूल स्वरूप खो चुके होते है।

कई बार तुमसे बात करके लगता है, मैं बेवजह तुमसे उम्मीद लगायें बैठा हूँ । तुम्हारें मन में कुछ नही है । ऐसे पागलों की तरह तुम्हारें बारे में ही सोचना, कभी मुस्कुरा देना, गा लेना,और अकेले में बैठ के thinking out loud सुनतें हुए तुम पर ग़ज़लें लिखना… क्या मतलब है इन सब का ? जैसे इतना सोचता हूं, एक आवाज आती है, अंदर से नही आती हर तरफ से आती है, ‘ अगर मतलब ही होता, तो वो इश्क क्यो होता’ । मैं बस मुस्कुरा देता हूं ।

मुझे सबसे ज्यादा बेकरारी है तो तुम्हारें ज़ज़्बातों को समझने की । मैं जानना चाहता हु, वाकई में क्या है तुम्हारें मन में । किसी दिन मैं तुम्हारी आदत से छूटने के लिए मेसेज ना करू तो तुम कर देती हो, और जितनी मोटिवेशनल वीडियो देखके दिन भर में तुम्हारी यादों से पीछा छुड़ाने के प्रयास किया रहता हूं, सबको एक पल में धराशायी कर देती हो । पर जब तुम होती हो, तो मेरे लिए सिर्फ तुम ही होती हो ।
सोचा था चलो अपने जन्मदिन वालें दिन तुम्हें चेक करूँगा । क्योकि वो क्या है कि ऐसे पोस्ट अक्सर facebook पर दिखते रहतें हैं जिसमे यह लिखा होता है, ‘अपने तो वो होतें है, जिन्हें अपनो का जन्मदिन याद रखने के लिए facebook remainder का सहारा नही लेना पड़ता है । ‘

सोचा चलो तुम्हारे मन मे मेरे लिए छिपे हुए अपनेपन को देखतें है । मैंने facebook पर से अपने birth date की privacy को only me कर दिया । और अपने उन दोस्तो को भी status में happy birth day लिखने से मना कर दिया जिन्हें मेरा birth day याद रहता है । उन्हें लगा शायद मैं celebrate नही करना चाहता इसलिए ऐसा बोला ।
मतलब अब तुम्हारें पास कोई स्रोत नही था जिससे कि तुम्हे पता चले कि आज मेरा birthday है । वैसे तो मुझे कोई उम्मीद नही थी कि तुम्हे मेरा birthday याद होगा क्योंकि तुमसे मिलने के बाद यह मेरा पहला birthday था ।

मुझे किसी बात का इंतज़ार नही था । कोई चमत्कार नही होने वाला था । मुझे पता था तुम्हे याद नही होगा, और होगा भी कैसे, इससे पहले मेरा कोई birthday थोड़ी celebrate किया था तुम्हारें साथ । मैं तो यू ही फोन में व्यस्त था । कभी तुम्हारी तश्वीर देखता तो कभी तुमसे पुरानी चैटिंग, और धीरे धीरे मुस्कुरा रहा था । तभी whatsapp पर मैसेज का tune बजता है और जब मैं मेसेज देखता हूं तो तुमको बता नही सकता कितना खुश हुआ था मैं। मैं नाचने लगा था । अरे चमत्कार ही था । जिस चमत्कार की उम्मीद भी नही थी, वो वाला चमत्कार था । तुम्हारा ही मेसेज था और लिखा था क्या तुमने ‘happy birth day in advance ‘ .
तुम्हें याद था पर कैसे? किस कोने में छिपा रखा है तुमने इतना अपनापन?

अभी मैं इस बात की खुशियां ही मना रहा था कि कब 12 बजे पता ही नही चला और तुमने फिर से wish कर दिया, वो भी पूरे 12 बजे साथ मे 2 पंक्तियों के साथ…? मतलब आज पागल बनाने का पूरा प्लान तुमने बना लिया था । अभी thankyou बगैरा के बाद जब बात खत्म हुई तो मुझे लगा अब तुम good night बोल के सो जाओगी पर तुमने ‘what else’ बोलके और पागल कर दिया । मतलब तुम अभी और बात करना चाहती थी । मेरी खुशी आसमान पर थी । सब कुछ चमत्कारिक हो रहा था , सब कुछ ।

तब तुम मुझपर उम्मीद ज्यादा अपनापन दिखाया पर जब उसके बाद मैंने तुमसे treat के लिए invite किया तब तुमने पहले church जाने की बात कही और सुबह तक बता पाओगी यह बोली । मैं सुबह का इंतज़ार करता रहा । और देखो ना आज सुबह सुबह पहला मेसेज भी तुमने ही कर दिया । तब मैंने पूछा तुमसे ‘ then what you decided? ‘ तब तुम्हारा जवाब सुन के दिल बैठ गया तुमने कहा ‘ actually I’m not feeling well so I can’t…’

कल रात जो सकारात्मकता तुमने दिखाया था को सब एक पल में धूमिल हो गया। ऐसा लगा जैसे तुम बहाने बना रही हो, नही मिलना चाहती मुझसे । अगर ऐसा है तो कल इतना अपनापन क्यो दिखाया था । तुम अक्सर ऐसे करती हो, एकपल में अपने पन का एहसास दिलाती हो और फिर हमारें बीच संस्कृतियों, सीमाओं, भाषाओं के बहुत फ़ासले है , यह एहसास करा देती हो ।

मैं अब भी नही जान सका कि वास्तव में तुम्हारें मन में क्या है माधुरी ? कभी कभी ऐसा लगता है कि मेरी और तुम्हारी कहानी उस पंछी की तरह जो सूर्य को पाने के लिए ऊँची उड़ान उड़ता है और अपने पंख जला लेता है। गिरता है, नए पंख निकलते है, फिर उड़ता है…. उसे सूर्य में अपनेपन की झलक दिखती है और वो बार बार उस सूर्य को पाने की चाहत में अपने पंख जलवाता रहता है….
इस पत्र को पढ़कर तुम हमेशा की तरह समझ तो जाओगी कि यह तुम्हारें लिए ही है पर फिर भी यही reply करोगी की ‘ I like it… ‘
– skj kabira

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