खत

खत

By | 2018-01-20T17:04:17+00:00 December 30th, 2017|Categories: कविता, प्रेम पत्र|Tags: , , |2 Comments

आज अलमारी साफ करते
मिले पुराने खत तुम्हारे
जिनमें आज भी आ रही है
तुम्हारे प्यार की खुशबू
आज भी याद है
वो पहला खत तुम्हारा
तुम्हारे प्यार से भी प्यारा
एक एक शब्द प्रेम में पगा
तुम्हारी छुअन हो ऐसा लगा
उसे जाने कितनी बार पढ़ा
तुम्हारी सलोनी मूरत को मन में गढ़ा
भेजा करते थे गुलाबी चिट्ठी
बातें होती थीं वो खट्टी मिट्ठी
करती थी इंतज़ार हफ्तों तक
तब कहीं आता था वो प्यारा खत
डाकिया देके जब भी जाता था
कोई न कोई उठा लाता था
और मुझे घण्टों वो सताता था
तब कहीं मेरे हाथ आता था
याद है अब भी वो सारा मंजर
मेरे सपनों में था यह प्यार घर
मेरी आंखों में था सुहाना सफर
मेरा साथी , मेरा हमसफर ।

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About the Author:

बीस वर्षों तक हिन्दी अध्यापन किया । अध्यापन के साथ शौकिया तौर पर थोडा बहुत लेखन कार्य भी करती रही । उझे सामजिक और पारिवारिक इश्यों पर कविता कहानी लेख आदि लिखना बेहद पसन्द है।

2 Comments

  1. Chandramohan Kisku January 7, 2018 at 8:09 am

    सुन्दर प्रेम पत्र के लिए मंजू जी को धन्यवाद आपने प्रेम की परिभाषा बड़ी ही सुन्दर दी है

    Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
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  2. Manju Singh May 20, 2018 at 11:43 am

    जी बहुत आभार !

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