बेदर्द दिसम्बर

बेदर्द दिसम्बर

By | 2018-01-20T17:04:17+00:00 December 31st, 2017|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

बेदर्द है दिसम्बर जज्बात बढ रहें है,
ख्वाबो में तुमको लेकर बाहों में भर रहें है।
यादों में तेरी डूब के अब रात काटते हैं।
तन्हाई जब सताती पूरी रात जागते है।

सांसों की तेरी खुशबू तकिये में ढूढते है,
ख्वाबो में तुमको पाकर बेतहाशा चूमते है।
बेताब है अब ये दिल बांहों में तुमको ले लें,
गालों को सहलायें और जुल्फों से तेरी खेलें।

लबों का जाम पीकर मदहोश हो जायें
मुझमें खो जाओ तुम हम तुझमे खो जायें।
सर्द सफेद सा दिसम्बर भी रंगीन हो जाये,
सांसो की तेरी गर्मी से ये मई जून हो जाये।

सर्द दिसम्बर में तल्ख बातों की गर्मी मिट जाये
गिले शिकवों के आंसू फिर आंख में ना आये
आखिरी महीनें में बस यही अरमान है हमारा
नये साल से हमेशा बस साथ हो तुम्हारा।

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