तुम्हारी अनुभूति

तुम्हारी अनुभूति

By | 2018-01-20T17:04:13+00:00 January 6th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |2 Comments

बिस्तर पर लेटते
सोने से कुछ क्षण पहले
आंखे मूंदते ही

टहलने लगता है मन
तुम्हारे साथ बीते लम्हों, जज्बातों
यादों की सतरंगी दुनिया में

और फिर चमक उठता है प्रेम में पिरोई
अनन्त शब्दों की मोतियां
एक-एक कर उन लम्हों की स्मृतियां
आंख की पुतलियों में प्रेम का अनोखा एहसास
बनकर झलकने लगती है

नजरों के आइने में बनता अक्श प्रेम का
मानो अंकित हो रहा हो मेरे हृदय पटल पर
प्रेम की अनुभूति

अवलोकित होता बंद पलकों से
कुछ कहे अनकहे एहसासों की दास्तां
कुछ पूरी कुछ अधूरी सी

गहराई जा रही आंखों में नींद का घना समंदर
पर आती नही
दुखने लगी है देर रात नींदे ख्वाब के इंतजार में
पर मैं बुनती रही रात भर जागती आंखों से
हमदोनों के सुनहरे सपने…..

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2 Comments

  1. Chandramohan Kisku January 7, 2018 at 5:16 pm

    सुन्दर कविता …..

    Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
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  2. Babli Sinha January 8, 2018 at 12:54 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद !

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