गोरी के गाल

गोरी के गाल

By | 2018-01-20T17:04:06+00:00 January 18th, 2018|Categories: अन्य, कविता|Tags: , , |0 Comments

गोरी के गाल
—————-

गोरी के गाल
है गये लाल
जो लगा गुलाल |

चटकी कमर
मटकी कमर
लचकी कमर |

आ गया फाग
चुनरी में लगा दाग
छिड़ गया राग |

बहके कदम
टूटे धरम
जो मिटी शरम |

संभाल मन
मंहके है तन
ये अनमोल धन |

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
गॉव रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,
फतेहाबाद, आगरा

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

About the Author:

Leave A Comment