नायिका प्रेम विचरण

नायिका प्रेम विचरण

By | 2018-01-20T17:04:05+00:00 January 19th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

पूर्णिमा की रातों में
बन जौत्सना चमक रही
दक्ष बना चन्द्रमा
फूलों पर आभा चमक रही
हरसिंगार महक फैली
उपवन में छटा बिखर रही
जुगनू की चमक
जैसे लुकछुप करती बिजली
ओस की बूंदें
पेड़ों पर मोती बन लुढ़क रही
रात की रानी
बन मंजरी खुश्बु फैल रही
ये कौन बाबरी
सोती सी रातों में खोयी सी
सांवली सूरत
बहुत खूबसूरत मन मोह रही
तुम चंचल नायक
ये वसुधा बनी धूम रही
प्रिय कामदेव
ये कौन रति बन झूम रही
#नीरजा शर्मा #
श्रंगार रस की कविता। नायिका चांदनी रात में अपने प्रियतम स्मरण करती बाबरी सी धूम रही है

Comments

comments

Rating: 3.7/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 6
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    6
    Shares

About the Author:

Leave A Comment