सीमा की पाबंदी

सीमा की पाबंदी

By | 2018-01-21T23:07:50+00:00 January 21st, 2018|Categories: कहानी|Tags: , , |0 Comments

सीमा के बाप को मरे हुए दो बरस हो गए हैं।फलेरिया से जूझते हुए मौत मिली थी।अब से पहले तीन बहनों का ब्याह हो चुका है।आज सीमा की शादी है।इस बार तो छप्पर भी नही बदले गए।वरना तो टूटे छप्पर पर पेंदा लगा लगाकर तीन बहनों की बारात आयी। इससे ज्यादा सजावट के नाम पर कुछ किया भी नही जा सकता था।एक कोठरी उसपर रखा छप्पर ही उनका आशियाना।दरवाजे दसियों बकरी पली हैं।जिन्हें बेचकर ही शादी हो पाती है।आशियाना कहना ठीक रहेगा?

महतारी अक्सर बिन ब्लाउज के एक झीनी सी धोती लपेटे इधर उधर काम करते हुए दिख जाती।
गांव के सम्पन्न लोगों के यहां काम धंधा किया करती।या फिर शादी मुंडन आदि शुभ अवसरों पर लोगों के यहां पानी भरती है।तीज त्यौहारों में भी।बाप पराये गांव में भार जलाता था।घर में अभी भी चिमनी ही जलती है।चोरी का कनेक्शन हो तो नही कह सकता।पर मुझे चकाचौंध नही दिखा।

आज शादी का दिन है।शाम के तीन बज चुके हैं।सीमा घर पर नही है।दरवाजे पर भी कोई खास चहल पहल भी नही है।दो चार बच्चों की जिद और हंसी सुनाई पड़ती है या फिर जीजाओं से दीदियों की झड़प मालूम पड़ती है।दारू पिए मेहमानों की पत्नियां बड़बड़ा रही हैं।

आखिर कुछ ही घण्टों बाद बारात आने वाली है।पर सीमा है कहां? अभी तक तो दिख रही थी।कहीं पड़ोस से चारपाई ला रही थी,कहीं दरवाजे सफाई कर रही थी।सुबह से घर से लेकर खलियान तक के काम निपटा रही थी।किंतु अब कहां है? कम से कम अब तो उसका उबटन हो जाए, पार्लर जाना चाहिए।सज संवर लेना चाहिए।मेंहदी भी नही लगी अबतक…

ऐसा भी हो सकता है पड़ोस के किसी घर में तैयार ही हो रही हो।या फिर किसी सहेली के सिफारिश से किसी ब्यूटी पार्लर पहुंच गयी हो।इन्हीं सबकी सम्भावनाएं है।कोई भी लड़की बारात से कुछ घण्टों पहले और क्या करेगी भला!!

जीवन के तमाम झंझावतों में उलझा ये परिवार बिल्कुल बेफिक्र था।सब अपने अपने उहापोह में।किसी को इस बात की चिंता नही कि लड़की कहां है।जिसे होती भी उसे पूरा भरोसा होता कि किसी काम के लिए कहीं गयी होगी।क्योंकि ये तो उनके लिए बड़ा सामान्य था।मां ने भी आवाज लगाकर अपनी ड्यूटी पूरी करके बोली… मरत होई कहूं!!

चार बजे सीमा अपने जानवरों को खदेड़ते हुए घर पहुंची।वो जानवरों को चरवाने ले गयी थी।यही उसका रोज का काम था।जो उसने आज भी पूरा किया। उसके लिए आज बहुत अलग नही था।रोज की तरह आज भी भागदौड़ थी।न ही कोई तोहफा न ही कोई प्यार से बोलने वाला।बस उसे ये पता था कि शाम को उसकी शादी है।उसकी तरफ से शादी को लेकर तैयारियां जीरो थी।

पता नही उसमें ख्वाहिशें ही नही थी,संवेदना की कमी थी।या फिर सब कुछ जब्त कर ले रही थी।भला इतना बेरुखा कोई कैसे…

रात हुई बारात आयी।वो अभी भी काम करने को आतुर थी।देर रात बाराती खा पी जब चले गए तो दोना पत्तल भी उठाया।साफ सफाई की।और अगले दिन दुल्हन बन… और कहीं मोर्चा सम्भालने चली गयी।
◆ Sudhanshu Srivastava◆

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