शीला और पढ़ाई

शीला और पढ़ाई

By | 2018-01-28T20:45:50+00:00 January 28th, 2018|Categories: कहानी|Tags: , , |0 Comments

यह एक काल्पनिक कहानी है। कहानी के पात्र भी काल्पनिक है।।
एक समय की बात है हम एक कस्बे में रहते थे हमारे मकान के सामने एक मकान बनना शुरू हो गया वहां काम करने के लिए मजदूर आ गये, वहीं झोंपड़ी बना कर रहने लगे। उनमें से एक औरत थी जो अपने चार बच्चों के साथ रहने आयी थी जिसका नाम ओमवती था। दोनों पति-पत्नी सुबह सवेरे मजदूरी के लिए काम लग जाते थे, ओमवती का कोई भी बच्चा स्कूल नहीं जाता था, उन चार बच्चों में सबसे छोटी उनकी बेटी थी। सभी बच्चे वहीं आसपास ऊधम मचाया करते और खेलते थे लेकिन ओमवती की छोटी बेटी उदास अपनी झोंपड़ी पर ही रहती थी और कभी-कभी रोने की आवाज भी आती थी एक दिन मैंने अचानक रोने की आवाज सुनी तो मैंने ओमवती को पास बुलाया और पूछा तेरी बेटी क्यों रोती रहती है।
ओमवती बोलीं पढ़ने की जिद करती है बहनजी बहुत रोती है कहती हैं मुझे पढ़ने जाना है मैंने उससे कहा तेरी बेटी को जोकि इतनी समझदार है इस उम्र में पढ़ाई का महत्व जानती है। ओमवती बोली हमारे घर में तो आजतलक पढ़ने नहीं गया सभी मजदूरी करते हैं और बोलीं हम जानते हैं कि जब हमारे बच्चे बड़े हो जाएंगे तो यही काम करेंगे क्या करूंगी इसे पढ़ाकर। मैंने कहा एक तो तेरे चार चार बच्चे हैं उस पर भी तू इन्हें पढ़ने नहीं भेजती है क्यों इन बच्चों का भविष्य खराब करती है ओमवती झट से बोली ऐसे मत बोलो बहिन जी बच्चे तो भगवान् की देन होते हैं जन्म लिया है तो ऊपर वाला खाने को भी देगा। क्या करती ओमवती की नासमझी पर मुस्करा कर रह गई
फिर भी मैं उसको समझाने लगी जो बच्चा पढ़ने जाना चाहता है कम से कम उसे तो भेज दे। और मैं समझाने लगी सरकारी स्कूल में भेज दे जहां ज्यादा फीस नहीं होती है और साथ में मुझसे जो हो सकेगा सहायता करूंगी मैंने पूछा तेरी उस छोटी बेटी का नाम क्या है वह बोली उसका नाम शीला है मैंने उसकी बेटी को बड़े प्यार से अपने पास बुलाया और पूछा कि बेटा तुम पढ़ना चाहते हो, बड़ी बड़ी गोल गोल आंखों में एक खुशी की चमक आ गई और बहुत ही प्रसन्नता के साथ बोली हां पढ़ने जाना चाहती हूँ लेकिन मां मुझे पढ़ने नहीं जाने देती है। फिर मुझे सामने वाला घर दिखाने लगी और कहती है आंटी उस वाले घर में मेरे साथ की लड़की की रहती है मैं उसके साथ खेलना चाहती हूं लेकिन उसकी मां मेरे साथ नहीं खेलने देती है मेरे लिए बोलती हैं ये गंदी बच्ची है इसलिए ना कि मैं पढ़ती नहीं हूँ आंखें बड़ी बड़ी करके कहती हैं उसके पास बहुत अच्छे अच्छे खिलौने हैं बहुत सुंदर फा़क पहनती है मैं भी चाहती हूं पढ़लिख कर उनकी तरह से रहूं इसलिए मां से कहती हूँ मुझे पढ़ने जाना है मैं नहीं चाहती कि तू सारे दिन बोझा ढ़ोए और मुझे भी तेरे जैसा नहीं बनना है।
उसकी बातों को सुनकर मन्त्र मुग्ध रह गई। छोटी सी उम्र में कितनी समझदार बच्ची है तभी मैंने सोच लिया इस बच्ची के लिए कुछ करना है मैं एक एन जीओ को जानती थी वहां गयी और उनसे बात की और बताया बच्ची बहुत होनहार है एन जी ओ वाले तैयार हो गए उस बच्ची के पढ़ाई का खर्चा उठाने के लिए। एक अच्छा काम करने के लिए मेरे अंदर एक संतुष्टि आ गई थी।
इस बात को मैं भूल चुकी थी कई साल बीत चुके थे एकदिन हमारे दरवाजे पर दस्तक आहट हुई मैंने बाहर जाकर देखा एक बहुत सुंदर सी प्यारी सी लड़की खड़ी है जो मुझे देखते ही मुझसे लिपट गई और कहने लगी आंटी मैं शीला हूँ आपके कारण आज मैं प्रशासनिक सेवा में हूँ और गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए भी कार्य कर रही हूँ शीला की मां भी साथ थी जो मेरे आगे हाथ जोड़कर खड़ी हुई थी कह रही थी आपके कारण मेरी बेटी आफिसर है मैं आपका अहसान मरते दम तक नहीं चुका सकती। मैंने हंसकर कहा कि मेरा कोई अहसान नहीं है बस एक निवेदन है जब भी कोई जरूरतमंद दिखे सहायता जरुर करें। मेरी भी खुशी की सीमा नहीं थी
#नीरजा शर्मा

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