भाषा

भाषा

कभी इन्कार की भाषा कभी इक़रार की भाषा
मुझे प्यारी लगा करती सदा ही प्यार की भाषा

फ़क़त जिस्मों के सौदे ही जहां दिन-रात होते हों
कभी अच्छी नहीं होती बुरे बाज़ार की भाषा

न होता है अदब इसमें न होता दिल कहीं इसमें
लिये चालाकियां होती सदा व्यापार की भाषा

कहीं नामोनिशां उनका नहीं है आज दुनिया में
डराते हैं जो लोगों को दिखा तलवार की भाषा

इशारा एक ही होगा लगे जब प्यास , देखो तो
भले इस पार की भाषा भले उस पार की भाषा

कहूं मैं मातरम वन्दे , नमन है मात-भाषा को
यही सर्वोपरी जग में मेरे आधार की भाषा

बना लो एक ही मक़सद यहां जीने का दुनिया में
चलो ‘आनन्द’ फैलायें जहां में प्यार की भाषा

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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~~~~~~~||| * परिचय *|||~~~~~~~ नाम : डॉ आनन्द किशोर ( Dr Anand Kishore ) उपनाम : 'आनन्द' सुपुत्र श्री लेखराज सिंह व श्रीमती रामरती धर्मपत्नी : श्रीमती अनीता पता : मौजपुर , दिल्ली शैक्षिणिक योग्यता : M.B.,B.S. सक्रिय लेखन : ग़ज़ल, कविता, गीत में विशेष रूझा

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