सानिया (भाग 2)

सानिया (भाग 2)

By | 2018-02-09T08:51:06+00:00 February 9th, 2018|Categories: कहानी, धारावाहिक|Tags: , , |0 Comments

अभी तक
सानिया एक हंसमुख लड़की होती है और विदेश में रहने वाले लड़के से शादी के लिए इन्कार कर देती है क्योंकि उसे अपने ही देश में रहना अच्छा लगता है साथ ही वह देशभक्त भी। अमर इसे अपमान समझ लेता है सानिया अमर के छोटे भाई की पत्नी बन जाती है। अमर कोई मौका नहीं छोड़ता सानिया से बदला लेने का।। आगे पढ़िए
अमर और अमर की पत्नी अमेरिका चले जाते हैं, लेकिन सानिया के मन में कई सवाल हैं जो घुमते रहते हैं सानिया बहुत दिनों से अपने मायका नहीं गयी थी इसलिए बच्चों के सहित छुट्टियां मनाने मां और पिता के पास आ जाती है। सानिया के पिता आर्मी में चीफ आफिसर थे सानिया अपने पिता के बहुत करीब थी ये आपस में एक-दूसरे से अपने मन की बात कह लेते थे और एक दूसरे को अच्छी तरह से समझते थे। सानिया के आने के बाद सानिया के पिता ने देखा सानिया गुमसुम सी रहने लगी है हंसती खेलती बिटिया नजर नहीं आ रही थी, पिता सानिया के पास गए और उन्होंने सानिया से पूछा क्या बात हो गयी बेटा बहुत उदास हो इतनी चुप क्यों हो, तुम तो कभी मुझसे कुछ नहीं छुपाती हमेशा कभी भी दुविधा में आती हो मुझसे बात जरूर करती हों।
सानिया आंखों में आंसू भरकर बोली समझ नहीं आ रहा आपको क्या बताऊँ फिर उसने सारी बात बताई और बोली बताओ पापा मैं कहां गलत थी मेरा अपमान क्यों उस घर में हुआ पापा में स्वाभिमानी हूँ अपने देश से प्यार करना गलत है मैं कुछ समझ नहीं पा रही।
सानिया के पिता बोले बेटा तुमसे कहीं गलती नहीं हुई है आजकल के नवयुवक विदेशी चमक धमक में मोहित हैं कुछ व्यक्ति नादानी में स्वदेश में रहने वालों को अनपढ़ और गंवार समझ लेते हैं हम भारतीयों का विदेश में रहना एक सपना है और आजकल के बच्चे पढ़ लिख कर विदेश में बसने लगे हैं वहां का जीवन उन्हें अच्छा लगता है और इसका कारण हमारे देश की अव्यवस्थाऐं भी हैं इतने साल आजादी के बाद दिन पर दिन व्यवस्थाएं बिगड़ती जा रही हैं भष्टाचारी आए दिन बच्चियों के साथ बलात्कार औरतों के साथ बदसलूकी बच्चों में नैतिक शिक्षा की कमी और खाने की वस्तुओं में मिलावट शहरों में प्रदुषण बढ़ता जा रहा है, इसलिए आजकल के बच्चे यहां पर बच्चे रहना नहीं चाहते उन्हें लगता ऐसी जगह रहने से तो विदेश अच्छा है, पिता सानिया से बोलते हैं रही आपके पति के बड़े भाई की बात तो ध्यान मत दो एक दिन उनको अपनी गलती महसूस होगी। सानिया बच्चा अपने कर्मों पर घ्यान दो हमारा जीवन कर्म प्रधान होना चाहिए हमारे भारत में गीता का ज्ञान है यहाँ की धरोहर है रामायण जैसे ग़न्थ हमारे देश में पाए जा सकते हैं हमारे देश की संस्कृति महान है। तुम अपने बच्चों को सही संस्कार दो अपने माता-पिता( सास ससुर) की सेवा करो और आगे बढ़ो।
सानिया अपनी ससुराल आ गयी अब उसका मन बहुत शांत था। शांत मन से अपने घर परिवार में जुट गई कई साल इसी तरह निकल गए। बच्चे बड़े हुए अच्छी नौकरी पर लग गए बच्चों की शादी हुई जिसमें सानिया के जेठ जेठानी आए सानिया ने देखा अमर और उनकी पत्नी के चेहरे से बहुत गहरी उदासी झलकती है चाहकर भी सानिया उनसे उदासी का कारण नहीं पूछ पायी अमर के बच्चे भी कभी भारत नहीं आए थे आखिर क्यों समझ नहीं पा रही थी सानिया।
ऐसा ही चलता रहा और कुछ दिनों बाद आदित्य और अमर के पिता का देहांत हो गया अमर और उनकी पत्नी भारत आए पर बच्चे फिर भी नहीं आए, पिता के सारे क़ियाक़म के बाद सानिया ने प्रण कर लिया उदासी का कारण पूछं कर ही रहूंगी। समय मिलने पर सानिया और आदित्य ने अमर से उनकी उदासी का कारण पूछा तो उनकी आंखों में आंसू आ गए कहने लगे पैसा तो खूब कमाया और एक शानदार जिंदगी भी पर हमें बच्चों का प्यार नहीं मिला बच्चे पश्चिम सभ्यता में ढल चुके हैं हमसे मोह नहीं है भारत आना नहीं चाहते भारत को पिछड़ा देश समझते हैं हमारे संस्कारों में कहीं कमी रह गई। फिर अमर आंखों में आंसू भरकर सानिया के आगे हाथ जोड़कर माफी मांगी बहन मैंने आपके साथ बहुत गलत व्यवहार किया मुझे माफ कर दो तुमने अपने बच्चों को बहुत ही अच्छे संस्कार दिए हैं बहुत ही अच्छा लगता है इन बच्चों को देखकर और बुरी तरह रोने लगे। उन्होंने कहा हमारा देश कितना भी पिछड़ा हो पर यहां की बात ही अलग है हमारा देश महान है पश्चिम में जो हम अपने बच्चों को नहीं सिखा सके
सानिया ने कहा कि अब आप यहाँ आ जाईए हमसब एक साथ मिलकर रहेंगे अमर उनकी पत्नी ने बात मान ली।। जयहिंद

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