मैं चिंतित हूँ

मैं चिंतित हूँ

मैं चिंतित हूँ
समाज के इस पतन को देखकर
मैं चिंतित हूँ
भाई को भाई से लड़ते देखकर
मैं चिंतित हूँ
पैसे के लिए लोगो को मरते देखकर
मैं चिंतित हूँ
इस बदलते परिवेश को देखकर
मैं चिंतित हूँ
क्योंकि राम अब नज़र नहीं आते
मैं चिंतित हूँ
हर तरफ दुर्योधन को देखकर
मैं चिंतित हूँ
खून से लथपथ अखबार देखकर
मैं चिंतित हूँ
भारत में गिरते संस्कार देखकर
मैं चिंतित हूँ
क्योंकि ये विषय अब भी गौण हैं
मैं चिंतित हूँ
क्योंकि लोग फिर भी मौन हैं
मैं चिंतित हूँ
क्योंकि कोई हल नज़र नहीं आता
मैं चिंतित हूँ
क्योंकि कोई और चिंतित नज़र नहीं आता

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  • 3
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    3
    Shares
प्राध्यापक(हिंदी साहित्य)

Leave A Comment