निजाम

निजाम

By | 2018-02-13T20:23:47+00:00 February 13th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

तरही गजल :-

करो वो काम कि दुनिया में नाम हो जाये।
भले दुश्मन की नींद भी हराम हो जाये।।

अपनी आंखों में यूँ मंजिल को बसा कर रखना।
वही दिखाई पड़े सुबह शाम हो जाये।।

बड़ा अजीब फसाना है इस जमाने का।
हो न हो काम खूब ताम झाम हो जाये।।

किसी की भी हो सफाई मगर ये ख्याल रहे।
इतनी ज्यादा न हो कि वो तमाम हो जाये।।

खिलाफ जुल्म के आवाज दब नहीं सकती।
चाहे कितना भी ये जालिम निजाम हो जाये।।

हमारे दर्द का हमदर्द कहीं हो तो सही।
खुदा करे कि एक ऐसा मुकाम हो जाये।।

मेरी आजादी का मतलब तो ये नहीं होता।
कोई किसी का कहीं भी गुलाम हो जाये।।
***जयराम राय ***

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