रहे जो युही

रहे जो युही

By | 2018-02-13T23:32:08+00:00 February 13th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

रहे जो युही उनकी भाव भंगीमा निहारते
स्वयं को उनके आंचलों में खुद को हम सवारते
प्रत्येक गीत में बस उनके नाम को पुकारते
प्रणय निवेदनो में वक्त व्यर्थ ही गुजारते —–
इसके आगे भी है अपने कर्म क्युँ रुके हुए
है आज शर्म से क्यों सर ये शर्म से झुके हुए ,
है रो रही क्यु वेदनाएँ खुद के यु ही हाल पे
है जमाना चुप ये क्युँ मेरे पुछे हुए सवाल पे ,
धरा भी धन्य हो गयी श्रवण सी अपने लाल पे
लिख दिया है नाम जिसने काल के कपाल पे ,
उठो दो तोड़ बंधनों को मोह को दो त्याग अब
भला न होगा देश का रहे जो खुद को उनपे वारते ——
सिंह सा जो साहसी था आज दास हो गया
उनके मोह पाश में अस्तित्व को वो खो गया ,
भ्रमर सा वो फंसा हुआ कमलानियों के मध्य में
तड़प रहा पपीहे सा वो उनके बिच लक्ष्य में ,
वो उनके चाँदनी सी है स्वरुप पे फ़िदा हुआ
भुलाकरके अस्तित्व को स्वयं से भी जुदा हुआ ,
तु तोड़ क्यु न पा रहा है उनके प्रेमजाल को
तू जाग देश को है अब जगाने की जरूरते ——–
धरा भी मन में आस ले विश्वास ले कहे यही
बदले तु भुगोल को रहे न नफरतें कही ,
तु गीत शाम आठों याम पे यु खुद को वार दे
जाग जा इस देश तस्वीर को सवार दे ,
झुका के अपने सर को उनसे प्रेम को क्यों मांगते उनकी भाव भंगीमा निहारते
स्वयं को उनके आंचलों में खुद को हम सवारते
प्रत्येक गीत में बस उनके नाम को पुकारते
प्रणय निवेदनो में वक्त व्यर्थ ही गुजारते —–
इसके आगे भी है अपने कर्म क्युँ रुके हुए
है आज शर्म से क्यों सर ये शर्म से झुके हुए ,
है रो रही क्यु वेदनाएँ खुद के यु ही हाल पे
है जमाना चुप ये क्युँ मेरे पुछे हुए सवाल पे ,
धरा भी धन्य हो गयी श्रवण सी अपने लाल पे
लिख दिया है नाम जिसने काल के कपाल पे ,
उठो दो तोड़ बंधनों को मोह को दो त्याग अब
भला न होगा देश का रहे जो खुद को उनपे वारते ——
सिंह सा जो साहसी था आज दास हो गया
उनके मोह पाश में अस्तित्व को वो खो गया ,
भ्रमर सा वो फंसा हुआ कमलानियों के मध्य में
तड़प रहा पपीहे सा वो उनके बिच लक्ष्य में ,
वो उनके चाँदनी सी है स्वरुप पे फ़िदा हुआ
भुलाकरके अस्तित्व को स्वयं से भी जुदा हुआ ,
तु तोड़ क्यु न पा रहा है उनके प्रेमजाल को
तू जाग देश को है अब जगाने की जरूरते ——–
धरा भी मन में आस ले विश्वास ले कहे यही
बदले तु भुगोल को रहे न नफरतें कही ,
तु गीत शाम आठों याम पे यु खुद को वार दे
जाग जा इस देश तस्वीर को सवार दे ,
झुका के अपने सर को उनसे प्रेम को क्यों मांगते |

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शिवानंद चौबे पिता .अशोक कुमार चौबे माँ .गीता देवी दो भाई .एक बहन ग्राम -महथूआ पोस्ट -औराई जिला -भदोही उत्तर प्रदेश

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