एक मुक्तक

एक मुक्तक

By | 2018-02-17T00:27:45+00:00 February 17th, 2018|Categories: मुक्तक|Tags: , , |1 Comment

क्षितिज को ढूँढता पागल मैं कोई परिंदा हुँ ,
खुद की इस उड़ान पे अब खुद से ही शर्मिंदा हुँ ,
तुम्हें इस बात का कोई इल्म है या भी नहीं ,शायद
तुम्हारे नाम पे मरता , तेरे ही नाम से जिन्दा हुँ ।

Comments

comments

Rating: 4.0/5. From 5 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 1
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    1
    Share

About the Author:

One Comment

  1. Aliya singh February 18, 2018 at 1:40 am

    Gajb….

    Rating: 2.0/5. From 1 vote. Show votes.
    Please wait...

Leave A Comment