मोती पा लिया है

मोती पा लिया है

मुक़द्दर ने मेरा बोसा लिया है

मुहब्बत का जो मोती पा लिया है

हमेशा आसमां ने इस ज़मीं पर
झुकाकर ख़ुद को यूं फैला लिया है

भरा है सीप का दामन सदा ही
सहारा फ़िर से गौहर का लिया है
( गौहर = मोती )

ठिकाना कर लिया साहिल पे देखो
किनारे ने मुझे अपना लिया है

चमकती रेत पर , तू सीप मेरा
तुझे अपना समझ लिपटा लिया है

समुन्दर दर्द का सारा निहां था
मगर मैंने वही टुकड़ा लिया है

चमत्कारों के पड़कर फेर में यूं
कभी ‘आनन्द’ धोखा खा लिया है

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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~~~~~~~||| * परिचय *|||~~~~~~~ नाम : डॉ आनन्द किशोर ( Dr Anand Kishore ) उपनाम : 'आनन्द' सुपुत्र श्री लेखराज सिंह व श्रीमती रामरती धर्मपत्नी : श्रीमती अनीता पता : मौजपुर , दिल्ली शैक्षिणिक योग्यता : M.B.,B.S. सक्रिय लेखन : ग़ज़ल, कविता, गीत में विशेष रूझा

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