नारी

नारी

By | 2018-02-18T23:58:52+00:00 February 18th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

नारी जीवन करुणामयी
घुटघुट कर जीती जाती
चोटें लगती गहरी गहरी
सत्ता पुरुष सदा हावी

कुछ विदो़ह कर उठतीं
कुछ चुप सहतीं रहतीं
सीता का जो दुख था
नहीं किसी कह पायी

अहिल्या की क्या गलती
जो पत्थर सा जीवन पाती
चाहे जब बाजार दिया
कभी मेनका कहलायी

नारी की अति सुंदरता
कितनी घातक बन जाती
#नीरजा शर्मा #

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