पिता का गर्व

पिता का गर्व

By | 2018-02-22T16:22:57+00:00 February 22nd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |3 Comments

बेटा जो देश पर शहीद हो गया,

मेरे जीवन का नूर खो गया ।

देशभक्ति का जो बीज बो गया,

हीरों में कोहीनूर हो गया ।

उसके जीवन की मुझे चाह थी,

देशभक्ति की उसने चुनी राह थी।

जब भी उसकी पकड़ी बाँह थी,

रगों में देश पर मर-मिटने की चाह थी।

देश की रक्षा उसका जुनून था,

शत्रुओं को देख खौलता ख़ून था ।

शरीर उसका भले लहूलुहान था,

मुख पर कुछ कर गुज़रने का सुकून था।

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परास्नातक,संस्कृत, इ०वि०वि०।(लब्ध -स्वर्णपदक) डी०फिल०, संस्कृत विभाग, इ०वि०वि०।

3 Comments

  1. Abhishek pandey March 2, 2018 at 10:46 am

    Very nice..

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  2. Abhishek pandey March 2, 2018 at 10:48 am

    Very nice

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  3. Upasana Pandey March 28, 2018 at 3:59 pm

    अभिषेक जी, शुक्रिया।

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