अध्यापक बदनाम है

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अध्यापक बदनाम है

By | 2018-02-25T11:47:31+00:00 February 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

समाज में सब अच्छे,अध्यापक बदनाम है।
बस हो यां रिक्शा हर जगह सुने
कि मास्टरों की तो खूब शान है।
समाज में सब अच्छे अध्यापक बदनाम है ।
समय पर आना,समय पर जाना ।।
रिजल्ट को अपलोड करना
मील का लेखा भरना
डाक का उत्तर देना
खाली पिरियड में भी यह
ढेरों काम कर जाना ।।
यह सब काम करते-करते
मोबाइल में डाटा भरते-भरते
फोन हाथ में देख सब होते हैरान हैं ।
समाज में सब अच्छे,अध्यापक बदनाम है ।
सब कहें मास्टरों की तो खूब शान है ।
समाज में सब अच्छे,अध्यापक बदनाम है ।
तभी हाजरी का सरक्युलर आया
बच्चों की गिनती को क्यों है कम बताया?
पूरा करो अभी सरकार का था
अलंकृत आदेश आया ।।
क्या बताएँ,कि सीमा को किसी सभ्य ने
अपने लाल के लालन वास्ते
था सस्ता खिलौना बनाया।।
श्यामा की क्या करें बात
जो हुआ,उस शादी-बर्बादी से अनजान है ।
इधर छोड़ नाता गुणवत्ता का
मात्रा-गिनती पूरी करने में
अध्यापक की निकाली जान है ।
सब कहें मास्टरों की तो खूब शान है ।
समाज में सब अच्छे अध्यापक बदनाम है ।
हो जनगणना यां वोट बनाने की ड्यूटी
चाहे चुनाव का गया हो बिगुल बजाया
छुड़ा कर कर्म भूमि
देकर देशभक्ति की दुहाई
सिलेबस का तार खुद तुड़वाया जाता
हर जगह अध्यापक को ही
क्यों कठपुतली बनाया जाता
ऐसी मौज देख संसार
होता परेशान है ।।
सब कहें मास्टरों की तो खूब शान है ।।
समाज में सब अच्छे अध्यापक बदनाम है ।।

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About the Author:

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

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