दोहरे मापदंड

दोहरे मापदंड

By | 2018-02-26T00:17:47+00:00 February 26th, 2018|Categories: कहानी|Tags: , , |1 Comment

मेरी बेटी कितनी भाग्यशाली है,मेरे दामाद का तो कहना ही क्या!मेरी बेटी की सांस में सांस लेता है। जरा भी शिकन नही आने देता शोभा के चेहरे पर।शोभा उदास होती है तो उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है।घर के काम मे भी पूरा हाथ बटाता है,बेबी को भी ऐसे सम्भालता है जैसे उसकी दूसरी मां हो।शोभा की मां अपनी सहेली को बडे गर्व से बता रही थी।उसी समय काजल इवनिंग शिफ्ट कर जब घर वापिस आई तो शोभा की मां जोर से बोली बहु आज आने मे देर कैसे हो गई?संजय कब से आया हुआ है।थक कर बेचारे ने चाय भी नही पी।चल अब जल्दी से चाय बना दे और बेबी को पकड,बहुत शरारती हो गया है थका देता है,बाऊ जी से पूछ लेना रात को क्या बनाना है —

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  1. SUBODH PATEL February 26, 2018 at 6:46 am

    लोग कहते है समाज बदल गया है पर सच तो ये है हमारी सोच खराब हो गई। अपनी बेटी के लिए तो ऐसा दामाद चाहिए जो उसके हर काम मे हाथ बटाए।
    और जब बारी अपने बेटे की आती है तो हम खुद कहते है कि की वो बीबी का गुलाम है। ये समाज की उपज नही हमारी खुद की गलत सोंच के नतीजे है

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