रंग

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By | 2018-02-28T22:28:40+00:00 February 28th, 2018|Categories: होली|Tags: , , |0 Comments

माँ मेरे पास आयी और डांटने लगी यह क्या अभी तुम ऐसे ही बैठी हो आज तुम्हारी रिंग सेहरामनी और संगीत है उठो तैयार हो जाओ। चारो ओर खुशी का माहौल था
कल मेरी शादी की तैयारियां हो रही थी। चाची बुआ तथा अन्य औरतें घर में वरनी गाने ढोलक की थाप पर लगी हुई थी , गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहीं थीं वरनी धीरे रे चलो ससुराल गलियां, मैं भी बैठे बैठे मुस्कुराने लगी नितिन की छवि नजर आने लगी तभी हमारा मोबाइल बजने लगा मैं उठ कर बात करने बाहर चली गई। तभी हमारी मौसी बड़बड़ाती हुई कहने लगी आजकल ये मोबाइल और चल गये चौबीस धंटे जाने क्या बात करते हैं हमारे जमाने में ऐसा कहां होता था बात की तो छोड़ो शक्ल भी देखने को नहीं मिलती थी झट से छोटी मौसी बोलीं सही कह रही हो अब समय बदल चुका है आजकल के बच्चे क्या कहें बस जो हो रहा है देखते जाओ । सारी सहेलियाँ हंसी ठिठोली करने में लगीं हुई थी और मुझे छेड़ने रही थीं। सुनीता मधुर आवाज में गाना गाने लगीं शरारती आंखे मटका कर मेरी तरफ मुखड़ा कर साजन से मिलन होगा शरमाने के दिन आ गए मैं उसे मारने को भागी सुनीता हंसते हुए गले लग गयी। मेरी सहेलियाँ सजने की ऐसी तैयारी हो रही थी जैसे कि शादी में सभी इन्हीं को देखने आ रहे हैं। धूमधाम से से रिंग सेहरामनी और संगीत हो गया सभी ने एक से एक बढ़कर डांस हुए मेरा और नितिन का भी डांस हुआ भाई और भाभी का तो लाजवाब डांस था। रात बहुत हो चुकी थी बिस्तर में पड़ते ही सो गए
सवेरे जब मेरी आंख खुली घर में शोर मचा हुआ था सभी कुछ ना कुछ कार्य में लगे हुए थे। पापा बरात की तैयारी में लगे हुए थे। चाचा जाने किसको जोर जोर से डांट रहे थे मैं अलसायी उठी कल कितनी थक गयी थी इतना भारी लहंगा सम्भलना मेरे लिए मुश्किल तो था ही। धूमधाम से शादी हो गई मैं ससुराल आ चुके थी
मैं नये घर में घुलमिल गई थी मुझे मेरे नंद और देवर ने मुझे महसूस नहीं होने दिया। यहां पर भी चहल पहल थी। हमारी सासू मां हम पर निहाल ही हुई जा रहीं थीं देवर नितिन और नंद दिव्या मेरे आगे पीछे घूम रहे थे उनके चेहरे की चमक देखते ही बनती थी। लग ही नहीं था हम किसी पराए घर में हैं अपनेपन की खुश्बु आ रही थी कि पति नितिन सवेरे ही आगे पीछे घूम रहे थे इसी बीच मां का फोन आ गया पूछने लगी कैसी हो बिटिया कैसी है तुम्हारी सास ठीक तो है कुछ गलत व्यवहार तो नहीं करती हम उन्हें समझाने लगे सभी बहुत अच्छे हैं यहां सभी मेरा ख्याल रखते हैं सासू मां बहुत प्यार करती हैं चिंता मत करो।
शादी को अभी बीस पच्चीस दिन ही हुए थे कि होली आ गई ये त्यौहार मुझे कभी अच्छा नहीं लगा पहले रंग लगाओ फिर रंग हटाते रहो लाल पीले मुंह कर लो। आज छोटी होली थी पूजन कर आए यहां तक तो सब अच्छा लग रहा था। कल के लिए डरे हुए थे। लेकिन मनन और दिव्या का उत्साह देखते ही बनता है मनन कह रहे थे भाभी ऐसा रंग लगाऊंगा आठ दिन तक चेहरा साफ नहीं होगा दिव्या खुशी से चिल्लाते हुए बोली हां भइया ऐसे ही रंग लगाएंगे नितिन को देखो शरारती हंसी हंस रहे हैं सासू सबको डांटते हुए बोलीं बहू को तंग मत करो होली कल है और उसे आज से ही परेशान कर रहे हो । लेकिन मैंने भी सोच लिया सवेरे दरवाजा नहीं खोलेंगे। ऐसे ही सोचते सो गयी।
सवेरे से ही अपने कमरे का दरवाजा बंद कर बैठ गयी मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी दरवाजा खोलने के लिए सासू मां पापा नितिन, मनन, और दिव्या लगे हुए थे दरवाजा खुलवाने के लिए मम्मी कह रही थीं बेटा दरवाजा खोलो, सासू मां ने ऐसा कहा तो मैं सोचने लगी क्या करुं मैं तैयार नहीं हो पा रही थी। तभी सासू मां बोली बेटा दरवाजा खोलो अपशकुन मत करो बस एक टीका लगाएंगे मैंने दरवाजा खोल दिया। सासू मां ने गुलाल का टीका लगाया और चली गई। लेकिन नितिन हमारा चेहरा रंग से भर दिया मनन और दिव्या भी रंग लगाने लगे अचानक हमारी आंख में रंग चला गया जलन होने लगी तड़प के जोर से चिल्लाने लगे ये देख सभी ठिठक गए थे क्या करें समझ नहीं आ रहा था सभी घबरा भी गये, आंखों की जलन बढ़ती जा रही थी सासू मां बोली पड़ोसी डाक्टर हैं उनके घर ले चलते हैं मुझे लेकर गए डाक्टर ने प्राथमिक चिकित्सा कर दी और बोले शाम को किसी आंख वाले डाक्टर को दिखा देना अच्छा हुआ मेरे पास ले आए वर्ना जिंदगी भर के लिए आंख चली जाती।
मम्मी देवर नंद को डांट रहीं थीं, कि कहीं ऐसे बिनआॅर्गेनिक रंगों से होली खेली जाती है, और ध्यान से ही खेलना था। सारी उम्र के लिए बहू की आंख चली जाती।
मेरा मन सासू मां के प्रति श्रद्धा से भर गया। और नंद देवर को गले से लगा लिया।।
#नीरजा शर्मा #

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