नीलकंठ कैलाशपति !

नीलकंठ कैलाशपति !

। । ॐ । ।

* भजन *

नीलकंठ कैलाशपति
हे दीनों के नाथ !
शीश विराजे चन्द्रमा
वामांगे सजती मात
नन्दीश्वर कृपा करो
मेरी बिगड़ी तुमरे हाथ

नन्दीश्वर कृपा करो !

दिवस के पीछे रैना चलती
रैना पीछे दिवस बावरा
उदयाचल से अस्ताचल तक
नित खेल देखती यह धरा

मेरे जीवन में हे प्रभु
इतनी लम्बी रात

नन्दीश्वर कृपा करो !

सांझ को पंछी वापस लौटें
घर अपने को आ रहे
सुबह के बिछुड़े पेड़ों के संग
गीत मिलन के गा रहे

मैं बिछुड़ा ऐसा अपनों से
ज्यों शाखा से पात

नन्दीश्वर कृपा करो !

बहती गाती नदिया सजनी
ज्यों पीहर से आ रही
न रुकती न टिकती पल – छिन
पी के अंक समा रही

मेरे मन का मीत न मिलता
खोजत हूं दिन – रात

नन्दीश्वर कृपा करो !

संग मेरे आकाश भी रोया
रोया पूरी रात
मन मेरा भी भीज गया
भीजे सब पेड़ों के पात

कैसा गीत मैं कैसे गाऊं
उठ जाएं तेरे हाथ

नन्दीश्वर कृपा करो !

न मैं चाहूं महल अटारी
न धन – दौलत न माया
मन में पीर बसी है मेरे
तुझसे बिछुड़ क्यों आया

अब जीना मोहे नाहीं सुहाए
मोहे राखो निज चरणों के पास

नन्दीश्वर कृपा करो !

१५-१०-२०१६. . वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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