लाल किताब या चमत्कार

लाल किताब या चमत्कार

* सत्य घटना पर आधारित लघु-कथा *

 

पांडे जी की घर वाली पड़ोसी के साथ भाग गई । थाना-पुलिस से निपटकर पांडे जी ज्योतिषियों-तांत्रिकों के यहां होते हुए एक ऐसे ज्योतिषी के यहां पहुंचे जो किसी समय उनके यहां नौकरी करते थे ।

ज्योतिषी महोदय सज्जन व्यक्ति थे । उन्होंने पांडे जी की व्यथा-कथा सुनने के बाद चाय-नाश्ता कराया । दोपहर का भोजन और सायंकाल की चाय भी पांडे जी की वहीं हुई ।

अगले दिन पांडे जी सुबह-सवेरे ही वहां पहुंच गए ।

इसके बाद उन्होंने कारोबार बेटे को सौंप दिया । और पूरा दिन वहीं बिताने लगे । समय बीतता गया ।

एक दिन पांडे जी की घर वाली लौट आई ।

अब पांडे जी ने ज्योतिष कार्यालय खोल लिया । अपने पास आने वाले लोगों को वे बताने लगे, “आठ किलो उड़द दान करें ।” “ग्यारह किलो गेहूं दान करें ।” “पांच किलो चावल दान करें ।” आदि-आदि ।
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लोग पूछते कहां दान करें ?

पांडे जी कहते किसी ब्राह्मण को दान करें । और यह बताना न भूलते कि मैं भी ब्राह्मण हूं ।

अब पांडे जी ने अपने बेटे को किराना की दुकान खुलवा दी ।

उस घटना के चालीस साल बाद, आज शहर लुधियाना की हर दूसरी-तीसरी गली में एक-न-एक ‘लाल किताब’ का ज्योतिषी बैठा है । और, बहुतों के पीछे ऐसी ही कोई-न-कोई कहानी है ।

५-८-३०१६ वेदप्रकाश लाम्बा

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