मेरे नयनों के उजियारे !

मेरे नयनों के उजियारे !

। । ॐ । ।

* भजन *

हे त्रिनेत्र त्रिशूलधारी
तीनों लोकों से न्यारे
मां गौरां के हृदयेश्वर
प्राणवल्लभ प्रीतम प्यारे

मेरे नयना बस जाओ
मेरे सूरज – चांद – सितारे

मेरे नयनों के उजियारे . . . . . !

आस का पंछी उड़ – उड़ जाए
ढूंढे रैन बसेरा
काली रात लगे मनभावन
दिन लगे दु:खों का डेरा

कभी इस पार कभी उस पार
मन डोले तुझको पुकारे

मेरे नयनों के उजियारे . . . . . !

पेड़ की जड़ धरती में बांधी
ऊपर फूल खिलाए
माली सींचे भरी दुपहरी
जामुन बन्दर खाए

लूट गए सुख – चैन लुटेरे
सब छूट गए हैं सहारे

मेरे नयनों के उजियारे . . . . . !

कब साथी छूटे कोई तारा टूटे
कोई समझ नहीं पाए
फूल – फूल भटकती मधुमख्खियां
मधु भालू पी जाए

बात सब बिगड़ी दुनिया उजड़ी
बन गए हैं हम बेचारे

मेरे नयनों के उजियारे . . . . . !

इक सुत तेरा देवों का रक्शक
दूजा गणपति कहावे
निर्धन – निर्बल पर आन पड़ी है
ज़रा कह दे किसको बुलावे

बलवानों के सब बन जाते
मेरी बिगड़ी कौन संवारे

मेरे नयनों के उजियारे . . . . . !

नाथों के नाथ भूतों के स्वामी
जटाओं में गंगा – धारा
भस्मरचैया मुखड़ा भोला
मनोहर सुन्दर प्यारा

तेरा हूं मैं तेरा ही हूं
मेरे दु:ख – सुख तेरे सारे

मेरे नयनों के उजियारे . . . . . !

१५-१०-२०१६. वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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