मेरे मनमोहन साँवरे . . . . . !

मेरे मनमोहन साँवरे . . . . . !

🕉

। । भजन । ।

कोई तो बता दो मोहे
किधर गए – किधर गए
मेरे मनमोहन सॉंवरे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

इधर भी देखा उधर भी देखा
नहीं श्याम दिखते जिधर भी देखा
दुख रहे मेरे पाँव रे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

प्यासा मन मेरी प्यासी अँखियाँ
हुई मैं बावरी कहती सखियाँ
जाऊँ मैं अब किस गाँव रे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

बछिया से पूछूँ गईया से पूछूँ
कैसे मैं जाके मईया से पूछूँ
गोपाल गया किस ठाँव रे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

पेड़ से पूछूँ पत्तियों से पूछूँ
फूलों से पूछूँ बगिया से पूछूँ
बंसीवाला बैठा किसकी छाँव रे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

चिड़िया से पूछूँ मोर से पूछूँ
साँझ से पूछूँ भोर से पूछूँ
चित्तचोर का मुझे नित चाव रे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

चँदा से पूछूँ तारों से पूछूँ
उपवन की मैं बहारों से पूछूँ
नंदकिशोर का न मिलता नाँव रे

कोई तो बता दो मोहे . . . . .

सूरज से जब पूछन लागी
बोला हँसके ओ बड़भागी
मन के भीतर झाँक रे

मिल गए – मिल गए
मेरे मनमोहन साँवरे

मिल गए – मिल गए !

३१-३-२०१५ -वेदप्रकाश लाम्बा
०९४६६०-१७३१२

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