शजर

शजर

By | 2018-03-10T09:02:14+00:00 March 10th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

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शजर
2122 2122 212

सांस सबको रोज़ देता है शजर
दोस्त मेरी ज़िन्दगी का है शजर

प्राणवायू दे रहा पत्ता हरिक
धूप में छाया लुटाता है शजर

फल, दवाई ,सब्जियां सबके लिये
ज़ीस्त को ख़ुशहाल करता है शजर

घौंसला देकर परिन्दों को सभी
बेघरों को भी बसाता है शजर

यूं परिन्दों या पशु , इंसान से
प्यार का रिश्ता निभाता है शजर

दूसरों के काम आकर के सदा
किस तरह जीना, सिखाता है शजर

गर भरे हों आप, झुककर ही रहो
झुकने का पैग़ाम देता है शजर

गर शजर मिटते मिटेगा आदमी
इस तरह दुनिया बचाता है शजर

इनके दम से ये जहां सारा हरा
जान लो आनन्द लाता है शजर
( शजर = वृक्ष / दरख़्त )

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली,9891629335
anandkishore@gmail.com
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~~~~~~~||| * परिचय *|||~~~~~~~ नाम : डॉ आनन्द किशोर ( Dr Anand Kishore ) उपनाम : 'आनन्द' सुपुत्र श्री लेखराज सिंह व श्रीमती रामरती धर्मपत्नी : श्रीमती अनीता पता : मौजपुर , दिल्ली शैक्षिणिक योग्यता : M.B.,B.S. सक्रिय लेखन : ग़ज़ल, कविता, गीत में विशेष रूझा

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