चाहता मन – फिर बचपन

चाहता मन – फिर बचपन

By | 2018-03-10T16:45:32+00:00 March 10th, 2018|Categories: मुक्तक|Tags: , , |1 Comment

करूँ मैं नेकियाँ दिनभर, या फिर बहुत अच्छा हो जाऊँ

अहिल्या की आस, मीरा की भक्ति सा सच्चा हो जाऊँ।

ख्वाहिशें बहुत ज्यादा नहीं हैं मेरी, ए मेरे परवरदीगार

करम इतना सा कर दे कि, मैं फिर से बच्चा हो जाऊँ।।

 

  • कवि आदित्य “अंस”

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About the Author:

नाम:- आदित्य राज छत्रपति निवासी:- महेशवास कलाँ, जयपुर, राजस्थान प्रचलित नाम:- कवि आदित्य अंस

One Comment

  1. saurabh_1 March 10, 2018 at 5:08 pm

    आपकी उम्र कम होगी पर आपकी कलम को उम्र से कई गुना अधिक अनुभव है…
    बहुत ही सुन्दर!
    लिखते रहें….

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