मेरा साथ : मेरा हौसला

मेरा साथ : मेरा हौसला

By | 2018-03-11T10:42:13+00:00 March 11th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

एक पल की घबराहट थी,

एक पल की सकपकाहट थी,

ना जानें कहाँ से,

ये बेचैनी आई थी।

गलत पता मिला था,

या गलत राह से आई थी।

शायद मालुम नहीं था उसे

जो कही थी मैं खुद से

प्रिय हो तुम मेरी प्रिय

पीछे तुझे हटने ना दुँगी,

अतीत के पन्ने कभी खुलनें ना दुँगी।

चलुँगी हर राह तुम्हारे साथ,

ना छोड़ूँगी कभी तुम्हारा हाथ।

थामूँगी तुझे जब तु गिरेगी,

सराहूँगी तुझे जब तु उड़ेगी।

तेरे रास्ते के गढ्ढो को भरूँगी मैं,

काँटों को उखाड़  फेकुँगी मैं।

पलके अब ना होंगें नम तेरी,

आँखो में अब ना होंगें गम तेरी।

लबो पर हँसी होंगी,

चेहरे पर खुशी होंगी।

उम्मीद की रोशनी हमेशा लाऊँगी मैं,

अंधेरे को दुर भगाऊँगी मैं।

ये साथ जो ना मेरा मुझे मिला होता,

ये वादा जो ना खुद से किया होता।

तो शायद टूट गई होती,

ये संसार छोड़ गई होती।

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