नव जीवन का सपना संजोती एक किशोरी

नव जीवन का सपना संजोती एक किशोरी

By | 2018-03-11T15:35:02+00:00 March 11th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |1 Comment

नव जीवन के सपने बुनती एक किशोरी के भाव कुछ इस तरह। .. . . . . . . .. . . . . . . . . .

स्पंदन था ह्रदय में मेरे
भावनाये पुलकित हो रही
मस्तिष्क में था स्वपनलोक सा भाव
नए स्वपन अवतरित हो रहे
मदहोशीयो सा भाव था मेरा
पाँव जमी से कोसो दूर थे मेरे
भावनाये कर अठखेलिया हृदय में मेरे
उमंग तरंग की लहरों पे सवार थी मै
हवा में संगीत सा मधुर ताना बाना था
नव जीवन के लिए मन में भाव लिए . . . . . . . . . . . .
      –  शालिनी जैन

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  1. SUBODH PATEL March 11, 2018 at 10:04 pm

    शानदार

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