गुबार

गुबार

By | 2018-03-11T23:01:10+00:00 March 11th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |1 Comment

 

दिल की बातों का भला ऐतबार कौन करे।
जो नासमझ है उसे समझदार कौन करे।।

मैं सब सवालों का  फौरन जबाब देता हूँ।
किसी भी बात का आखिर उधार कौन करे।।

जिसे उड़ाना है उसको उड़ा के ले आओ।
हवा ने सोच लिया है गुबार कौन करे।।

दुआ सलाम किसी से वो नहीं करते हैं।
अगर मिलें तो उन्हें नमस्कार कौन करे।

हमारे दर्द से जो दिल नहीं पिघलते हैं।
मेरे हमदर्दों में उनको शुमार कौन करे।।

बन्द आँखों से भी मैं तुमको देख लेता हूंँ।
आमने-सामने तेरा दीदार कौन करे।।

जिनके वादों का भरोसा कभी नहीं होता।
ऐसे लोगों का कहीं इन्तजार कौन करे।।
– जयराम राय

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One Comment

  1. saurabh_1 March 11, 2018 at 11:58 pm

    जयराम जी आपके कलम में कुछ बात तो अलग है ….बहुत ही उम्दा !!!

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