किये का फल

किये का फल

By | 2018-03-12T21:18:30+00:00 March 12th, 2018|Categories: लघुकथा|Tags: , , |0 Comments

।। किये का फल ।।

पाँच वर्षीय आयुष ने अपनी माँ के आँसू पोंछते हुए माँ से बड़ी मासूमियत से पूछा, “माँ, माँ, आपने बताया था कि अगर कोई बुरा काम करता है तो भगवान उसे सजा देते हैं। तो पापा इतना झूठ बोलते और आपको रूलाते

भी हैं तो पापा को कब सजा मिलेगी?”

 

माँ ने कहा, “बेटा, जब हम कोई गलत काम करते है या किसी को कोई चोट पहुँचाते हैं तो अगर हमें सजा नहीं मिलती तो इसका मतलब है कि भगवान हमें सुधरने का मौका दे रहा है इसलिए हमें अपनी पहली गलती पर ही सुधर जाना चाहिए । और फिर भी हम गलत काम करते हैं भगवान फिर हमें फिर सुधरने का मौका देता है कि अब सुधर तो जाओ अगर हम फिर से गलत काम करते है तो कुछ और मौके देता कि शायद ये अब तो सुधर जायेगा। फिर भी अगर इंसान बार बार गलत काम करता रहता है तो भगवान को यकीन हो जाता है कि ये सुधरने वाला नहीं है। और भगवान उसके किये गये अपराधों को गिन कर उसे इकठ्ठी सजा देता है।”

 

बच्चे ने सहमते हुए माँ से पूछा कि, “तो अब पापा को क्या सजा मिलेगी।”

 

माँ के पास इस बार बच्चों के प्रश्न का कोई जबाब न था। माँ बस इतना कह कर चुप हो गयी कि भगवान क्या करेगा सिर्फ भगवान ही जानता है। और अपने बच्चे को गले लगा लिया और मन ही मन रोने लगी।

-पारुल शर्मा

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लिखना मेरी रग रग में है

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