हत्यारे बचपन के

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हत्यारे बचपन के

By | 2018-03-18T22:08:54+00:00 March 18th, 2018|Categories: कविता, बचपन|Tags: , , |0 Comments

।। हत्यारे बचपन के।।

एक प्यारी छोटी सी बाला
मां का आंचल कभी न छूटा
पिता की भी अति दुलारी

बुरे दिन जब भी हैं आते
बला आती बिन बुलाए
घर में तूफां ऐसा आया

बच्ची को गुंडों ने उठाया
ले गए सूनसान जगह पर
उसको जाकर वहां छिपाया

वहां बालाएं और बहुत थीं
जो अपनी किस्मत पर रोतीं
खरीद फरोख्त उनकी होती

जैसे कोई बाजार की मंडी
बलात्कार फिर उनके होते
चीख चीत्कार वहां पर मचती

रोती थी कमसिन बालाएं
आंसूओं की नदियां बहती
इतना दुख दारुण वहां पर

क्यों न धरती तू फटती
भूकंप तू चुप क्यों बैठा
शिव जी तेरा नेत्र कहां है

विष्णु तुने सोचा क्या है
प्रलय यहां हर ओर मची है
#नीरजा शर्मा #

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