असर

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असर

By | 2018-03-22T21:27:59+00:00 March 22nd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments
होने लगा है असर धीरे धीरे
हुई शाम अब सुबह से धीरे धीरे
ना मंजिल थी ना हमसफ़र साथ मेरा
छोड़ गया वो इस कदर साथ मेरा
हो गयी है नीचे अब नजर धीरे धीरे
होने लगा है असर धीरे धीरे
जहाँ से चला था कारवां साथ मेरे
आया था वो भी कुछ दूर साथ मेरे
मझधार में  छुटेगी पतवार धीरे धीरे
ना मालूम था होगा उससे सबर धीरे धीरे
किनारा तो मिलना बहुत दूर था
पर मेरा यार कितना मजबूर था
मेरा साथ छोड़ा इस कदर धीरे धीरे
होने लगा है असर धीरे धीरे
आज ना मै हूँ ना मेरी कोई पहचान है
एक जिन्दा लाश हूँ जिसमे ना जान है
दफ़न हो गया “राज” कबर में धीरे धीरे
होने लगा है असर धीरे धीरे

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About the Author:

मेरा नाम संजय सरोज है और मै मुंबई में अपनी पूरी फैमिली के साथ रहता हूँ​, हिंदी से स्नातक यहीं मुंबई से ही किया है. वैसे मेरा नेटिव प्लेस जौनपुर उत्तरप्रदेश है फ़िलहाल मै एक प्राइवेट कंपनी में ८ वर्षों से कार्यरत हूँ कभी- कभी कुछ कवितायेँ और रचनाएँ लिखता हूँ मुझसे आप निचे दिए गए मोबाइल नंबर और ईमेल पर सम्पर्क कर सकते है आपका, संजय सरोज मोबाइल ​ :- ९९२०३३६६६० /९९६७३४४५८८ ​ ईमेल : sanjaynsaroj@gmail.com sanjaynsaroj@yahoo.com

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