रूसवाई

रूसवाई

By | 2018-03-30T23:14:51+00:00 March 30th, 2018|Categories: मुक्तक|Tags: , , |0 Comments

तू कहां मुझसे जुदा हो पाया,
मेरे आशारो में,
क्या तुझे तू नजर नही आता|

यह तो वायदा है महज,
तेरा मुझसे मेरा तुझसे,
के रूसवाई से तडप अच्छी है|

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