गौरिया

गौरिया

By | 2018-03-31T21:12:03+00:00 March 31st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |1 Comment

गौरिया बोली हमे बचा लो
खतरे में है अस्तित्व हमारा
प्रगति रथ पर हो चले सब सवार
वो प्रगति बन रही हमारा काल
हम कहाँ जाये ?
कहाँ चहचाये ?
चारो ओर खड़े ऊंचे स्तम्भ दूरभाष के
चारो ओर फैली चुम्बकी तरंगे
खतरे में है हमारा जीवन
सुबह सवेरे आंगन में आना और चहचाना
भाता था तुमको
हमे फिर आंगन में बुला लो
हमारा अस्तित्व बचा लो
शालिनी जैन

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One Comment

  1. Sanjay Saroj "Raj" April 3, 2018 at 12:37 pm

    सुन्दर रचना !!!!

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