मुद्दा आरक्षण का

मुद्दा आरक्षण का

इस से अच्छा तो वो वक़्त था
सब अनेक थे, पर एक थे
सब का मकसद एक था
सब के इरादे नेक थे
अंग्रेजों को भगाना था
देश को बचाना था
इस से ज्यादा उनको
और नहीं कुछ पाना था
अब इस सोच में डूबे हैं हम
कि
लोग पहले ज्यादा अज्ञानी थे
या आज ज्यादा अज्ञानी है
क्यों समझ नहीं पाते कि
किस मुद्दे पर हमें लड़ना है
और कौनसा मुद्दा बेमानी है
आरक्षण की तख्ती लेकर
हर कोई खड़ा हो जाता है
जातिवाद के नाम पर
केवल हिंसा फैलाता है
नेताओं की राजनीति में
ये मुद्दा उलझता जाता है
इस से नुकसान कोई और नहीं
आम आदमी ही उठाता है
लड़ो, मगर उनके लिए
जो वास्तव में गरीब है
पढ़ने तक को पैसे नहीं हैं
कहते हैं ये ही नसीब है
जो विद्यालय तक नही जा रहे
वो क्या आरक्षण का लाभ उठायेंगे
कुछ को मिलेगा फायदा यहाँ
और गरीब तो गरीब ही रह जायेंगे
जाति के नाम पर मरने वालो
तुम्हें मेरा ये सन्देश है
जाति के लिए क्या मरते हो
गुमनाम ही रह जाओगे
मरना है तो वतन के लिए मरो
शहीदों में तो नाम लिखाओगे
क्यों आरक्षण का रोना रोते हो
इस से क्या हासिल हो जाएगा
सब के पिछड़ा बनने की होड़ में
हमारा देश ही पिछड़ा रह जाएगा
हमारा देश ही पिछड़ा रह जाएगा

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प्राध्यापक(हिंदी साहित्य)

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