स्त्री

स्त्री

By | 2018-04-06T21:16:10+00:00 April 6th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

स्त्री। . . . . .
बेटी माँ पत्नी और बहू
हर रूप में जानी जाती
घर ही नहीं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाती
स्त्री रूप है शक्ति का
संसार को बनाने वाली और चलाने वाली
धैर्य की मूरत है स्त्री
देवी का स्वरुप है स्त्री
स्त्री एक शैक्षणिक संस्थान सामान है जो गुणों की खान है
स्त्री दया की मूरत है
योग्यताओ से है भरी
एक अच्छी मार्गदर्शक और संचालक है
स्त्री। . . . . . .. . . . .
shalinijain

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