तेरी ओर

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तेरी ओर

By | 2018-04-08T12:37:54+00:00 April 8th, 2018|Categories: मुक्तक|Tags: , , |0 Comments

हिसाब-किताब लगाया,
तो क्या बताएं योगी?
तेरी यादों का काफिला,
मेरी उम्र से लम्बा निकला |
सफर मे चले तो हौसलें से,
मगर हर रास्ते हर पडाव पर,
तेरी ओर कम्बख्त पांव फिसला |

  – अंजना योगी

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