ज़हर के व्यापार

Home » ज़हर के व्यापार

ज़हर के व्यापार

By | 2018-04-12T21:34:50+00:00 April 12th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

 

मैं रहीम तू राम कोई ।
मैं मुहम्मद तू शाम कोई ।
धर्म के नाम पर न यूँ खंड किए जाएं ।।
ज़हर के ये व्यापार बंद किए जाएं ।।
यीशु तेरा गुरु मेरा ।
बुद्ध तेरा c मेरा ।
राजनीति के ये झूठे प्रपंच न रचे जाएं ।।
हथियारों के ये दौर रद्द किए जाएं ।।
मैं स्वर्ण तू दीन कहीं का !
मैं दलित तू मनु कहीं का !
यूँ चिंगारियों के न अलाव जलाए जाएं ।।
बात-बात पर देश में न यूँ बंद किए जाएं ।।
ज़हर के ये व्यापार बंद किए जाएं ।।
।।मुक्ता शर्मा ।।

Comments

comments

Rating: 4.5/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 5
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • 1
  •  
  •  
  •  
    6
    Shares

About the Author:

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

Leave A Comment