कल और आजकल

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कल और आजकल

By | 2018-04-13T21:16:46+00:00 April 13th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

उनवान ‘ आजकल, पर एक गजल:-

कल से मिलिए आजकल को जानने के वास्ते।
आने वाले कल को बेहतर आँकने के वास्ते।।

उनके चेहरे पर गजब का N है हम क्या करें।
आँख झपकानी पड़ेगी देखने के वास्ते।।

कुछ तो मौका दिन में भी सोने का होना चाहिए।
रात की निगरानियों में जागने के वास्ते।।

जुल्म से तो हम सभी को मिलके लड़ना चाहिए।
हम अकेले लड़ रहे हैं हारने के वास्ते।।

एक किनारे भीड़ में कुछ देर रुककर देखिए ।
सब के सब तैयार हों जब भागने के वास्ते।।
**जयराम राय **

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