मैंआभारी हूं।

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By | 2018-04-15T12:53:44+00:00 April 15th, 2018|Categories: आलेख|Tags: , |0 Comments

मैं फेसबुक की आभारी हूं
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आज मुझे कहने मे अच्छा लग रहा है कि फेसबुक ने एक लोकतांत्रिक मंच खडा कर दिया है।यह अलग बात है कि कुछ बुद्धिजीवियों को यह हजम नही हो रहा कि आज प्रत्येक जन कविता,लेख आदि के माध्यम से अपने विचार प्रचार कर सकता है।उन्हे तथाकथित लेखक वगैरह कहा जाता है।कविता तो प्रबल भावनाओं कास्वतःस्फूर्त प्रवाह(spontaneous overflow of powerful feelings)होता है।किसी डिग्री के मोहताज नही होते भाव।कबीर,तुलसी,सूरदास जी अनूठा उदाहरण हैं।
कुछ संदर्भो मे कह सकते हैं कि सब अच्छा ही प्रकाशित होता है अपवाद है।निर्णय अपना है जोअच्छा लगे उसे अपना लो जो बुरा लगे उसे जाने दो।लाभ-हानि तो साथ-साथ हैं—स्कूल के समय से ही पढते आ रहें है विज्ञान के लाभ-हानियां । अनुरोध है उनसे जो साहित्य सृजन पर मात्र अपना अधिकार मानते हैं वह तथाकथितों को मत पढें।
लेखक मण्डली ग्रुप को धन्यवाद जनमानस तक पहुंचने और पहुंचाने का।
अंजना योगी

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