आना मेरे गाॅव मै आपको संडावता दिखाता हुॅ।

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आना मेरे गाॅव मै आपको संडावता दिखाता हुॅ।

मैने अपनी कलम से गाॅव की विशेषताए अपने शब्दो मे लेकर एक छोटी सी कविता बनाई है|

आॅखो के दरमियान,मै अपनी एकता दिखाता हूँ।

आना कभी मेरे गाॅव,मै आपको संडावता दिखाता हूँ।

पप्पू की मेहनत से बने,पोहे समोसे की कीमत बताता हूँ।

मै आपके मुॅह से उसके लिये, बस वाह सुनना चाहता हूँ।

मै प्यार के रंगो से पनपि,चित्रकला दिखाता हूँ।

मै सावारिया सेठ के मंदिर की,सुंदरता की गाथा सुनाता हूँ।

नृसिह मंदिर,खेडापति हनुमान मंदिर का इतिहास बताताहूँ।

कितनी महिमा है इनकी ,गाॅव वालो के मुॅह से सुनवाता हूँ।

परमपुज्यनीय गुरूजी की ,सुंदर कुटिया दिखाता हूँ।

आना कभी मेरे गाॅव,मै आपको संडावता दिखाता हूँ।

मीठी बोली मीठे पानी मे,आसपास की सैर करता हूँ।

बरखेडा,सोनखेडा,झिरी और सेमली की मै मल्हार गाता हूँ।

पाठातलाई तीरथ करके,मै भगवान भोले को फूल चढंता हूँ।

भूमका के भूमकेश्वर मंदिर की,गाथा मै गीत भजन से गाता हूँ।

जीते जी इस धरती पर ,स्वर्ग के दर्शन करता हूँ।

आना कभी मेरे गाॅव मै आपको संडावता दिखाता हूँ।

घूंघट मे जीती मर्यादा और सजनता का मतलब समझाता हूँ।

अन्नपूर्णा माता के मंदिर से मै,विश्व शांति की बात सुनाता हूँ।

गाॅव है मेरा कितना सुंदर ,यह आपको बताता हूँ।

होटो पे मुस्कान लिये,मूछो पे ताव देते गाॅव के लोगो की परिभाषा बताता हूँ।

हिन्दुओ की बस्ती मे पूजा के बाद अजान सुनाता हूँ।

आना कभी मेरे गाॅव मै आपको संडावता दिखाता हूँ।

यह कविता गाॅव को समर्पित करता हूँ।

गाॅव के बुजुर्गो को प्रणाम करता हूँ।

हेमन्त दुबे,

गाॅव –  संडावता ,तहसिल -सांरगपुर

जिला -राजगढ (म.प्र.)

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