जर्द पत्ते

जर्द पत्ते

By | 2018-04-17T02:12:49+00:00 April 17th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

तरही गजल :-

हवा तो सिर्फ एक बहाना था।
जर्द पत्तों को गिर ही जाना था।।

बुला लिया गजब इशारे से।
बिना बोले उन्हें बुलाना था।।

बेफिकर होके सोने वालों को।
वक्त रहते हमें जगाना था।।

जेब खाली हुई मंहगाई में।
घर में सामान कुछ मंगाना था।।

गरीब माँ को अपने बच्चे को।
सूखी रोटियाँ खिलाना था।।

वहीं बगल के कुछ अमीरों को।
छप्पन भोग भी लगाना था।।
 -जयराम राय 

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