लघुकथा

लघुकथा

By | 2018-04-17T02:10:54+00:00 April 17th, 2018|Categories: लघुकथा|Tags: , , |0 Comments

लघुकथा
जल्दी जल्दी तैयार होकर स्कूल जाने की तैयारी करती हुई मां को आवाज दी, मां खाना दो मुझे देर हो रही है। पहले ही मुझे देर हो चुकी है स्कूल बस निकल जाएगी जैसे तैसे खाना मुंह में ठूंसा और भागती हुई बाहर निकल गई। सामने स्कूल बस जाती दिखाई दी मनमसोस कर रह गई सोचा चलो रिक्शा करके चलते हैं।
रिक्शा वाले से पैसे तय कर रही थी कि सामने एक वृध्दा दिखाई दी मुझे जानी पहचानी सी लगीं ध्यान से देखा तो दंग रह गयी अरे ये तो मिसेज वर्मा की सास थी पहचान नहीं आ रहीं थीं। अपनी तरफ मुझे देखते देखा तो मुझसे कुछ खाने को मागनें लगीं, मैंने समाने वाली दुकान से समोसे दिला दिए। मैं स्तब्ध उन्हें देखे जा रही थी मैली कुचली साड़ी पहने बिखरे हुए बाल ऊपर से नीचे तक धूल से भरी हुई बेबस नजर आ रहीं थीं। समोसे ऐसे टुट पड़ी थीं जाने कबसे खाना ना खाया हो।
मुझे इस समय उनकी सास को घर छोड़ना ज्यादा आवश्यक लगा। पिंसिपल से थोड़ी देर के लिए मोहलत मांगी फिर मांजी को रिक्शे में बिठा उन्हें घर छोड़ने चल दी। रास्ते में सोचती जा रही थी
मिसेज वर्मा अपनी सास का कितना ध्यान रखती हैं कितने दिनों से अपनी सास के लिए परेशान थीं कुछ दिनों से उनकी सासू मां घर से निकल गयी थीं और उनकी याद्दाश्त खो चुकी थी। लगातार ढूंढने में लगीं थीं कहीं मिल नहीं रहीं थीं वह हमेशा अपनी सासू मां को अपने नजरों के आगे हटने नहीं देती थीं,
लेकिन छह महीने पहले की बेटे की शादी की थी। उन्होंने सोचा बहू है घर में दो या तीन के लिए अपने मायका हो आऊं अब जा सकती हूँ, बहू को निर्देश देकर चलीं गई। बहू उनका बहुत ख्याल रखती थीं पर बच्चा ही है जाने कब नजर से बच कर बाहर निकल गयीं और जब मिसेज वर्मा वापस आयीं अपनी सास को ना देखकर बहू से नाराज हो गयीं। बहुत बुरा भला कहा बहू को लेकिन क्या कर सकतीं ढूंढने के अलावा उनका घर आ चुका था मैंने उनके घर की काॅलवेल बजाई बाहर आकर मिसेज वर्मा अपनी सास को देखकर रोने लगी और मेरी तरफ कृतज्ञता से देखने लगीं।।
##नीरजा शर्मा #

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