तेरा इंतज़ार है !

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तेरा इंतज़ार है !

प्रस्तुत गीत १७-९-१९७३ को लिखा गया था ; आपके मन को छुए तो मन से आशीष दें ।

* तेरा इंतज़ार है *

ग़म के सहराओं में
मौत की छाँओं में
बस यूँ ज़िन्दा हैं हम
ज़िन्दगी ख़ुद हमसे शर्मसार है
तेरा इंतज़ार है

तेरा इंतज़ार है . . . . .

रात रो – रो गुज़र जाए जाने – जहाँ
बज़्म तारों की वीरान तेरे बिना
सांस नश्तर – सी है
निगाह बेकरार है
तेरा इंतज़ार है

तेरा इंतज़ार है . . . . .

हवाएं ख़ामोश गुज़रती हैं इस ओर से
फिज़ाएं सर्द हैं अब तक ज़ुल्म – ज़ोर से
बहार है गुमशुदा ओ जाने – बहार
हर गुल ख़ार है
तेरा इंतज़ार है

तेरा इंतज़ार है . . . . .

तोड़ दे – तोड़ दे आज रस्मो – रिवाज़
सिसकता है कब से ज़िन्दगानी का साज़
छेड़ दे – छेड़ दे नग़मा – ए – वफ़ा
चश्म तर हैं तमन्ना बेज़ार है
तेरा इंतज़ार है

तेरा इंतज़ार है . . . . .

आ जा अब तो कि थक गए हैं कदम
वक्त है मुख़्तसिर और निकलने को दम
हम हैं और तन्हाइयाँ
राह दुश्वार है
तेरा इंतज़ार है

तेरा इंतज़ार है . . . . . !

११-४-२०१८

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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