क्या हम बदल गये

क्या हम बदल गये

By | 2018-04-16T23:43:14+00:00 April 16th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

इन कायरो की बस्ती में रहना

दुश्वार हो रहा है…

कोई मुसलमां का तो कोई हिन्दु का

तलबगार हो रहा है…

जिनके साथ सुख दुख अपना बाँटते थे

अब तक….

उन्हीं का हमारे जख्मों पर वार

हो रहा है…

जँहा औरतों की हिफाज़त धर्म है हमारा

वो अब बच्चियों को भी नोचने के लिये

तैयार हो रहा है…

मै नहीं जानती हिन्दु और मुसलमान की लडा़ई

यहाँ इंसानियत का चोला शर्मसार हो रहा है….

हम इंसान होकर इंसानियत अब छोड़ने लगे है

खुद के बनाये घरौदें खुद ही तोड़ने लगे है….

नफरत भरी दिलो में दिखावे से प्यार हो रहा है….

एक चेहरे पर कई चेहरे है नज़र आती नहीं हकिकत

कि इंसान भी अब जानवर की तरह खूँखार हो

रहा है….

इन कायरो की बस्ती में रहना दुशवार हो रहा है।।।

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