झूठ एक अनबूझ पहेली

Home » झूठ एक अनबूझ पहेली

झूठ एक अनबूझ पहेली

By | 2018-04-17T18:33:09+00:00 April 17th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

वो झूठ ही है जिसने कितनो का दिल दुखाया है

वो झूठ ही है जिसने कितनो को रुलाया है..

वो झूठ ही है जिससे अपने दूर हो गये

वो झूठ ही है जाने कितने मजबूर हो गये..

वो झूठ ही है जो सत्य पर खडा़ मुस्कुराया है

वो झूठ ही है जिसने कितनो का घर जलाया है….

वो झूठ ही है जहाँ रिश्ते बेईमान बन गये

वो झूठ ही है जहाँ कितने ईमान जल गये…

वो झूठ ही है जिसने कितनो का सर झुकाया है

वो झूठ ही है जहाँ अंधियारा मुस्कुराया है….

मगर झूठ की एक खासियत सच पर पडी़ भारी

जहाँ आंखो में छुपाकर आसुँओं को मुस्कुराती

दिखी नारी…..

वो झूठ ही था जहाँ आग में लिपटी हुई बेटी

बोली की मै खुश हूँ…

ग़रीब होकर भी वो पिता फिर मुस्कुराया है….

वो झूठ ही था जहाँ इक बहन बोली कि मै खुश हूँ

यही सुनकर के वो भाई खुशी से खिलखिलाया है….

जब रिश्तो की दिवारे गिरने लगी पल पल

वो झूठ ही था जिसने फिर से घर बनाया है….

वो झूठ ही था जिसने रोते को हसाया है

वो झूठ ही था जिसने दुरियों को मिटाया है….

ये झूठ ना होता तो खाली फासले होते

लोग दूर ही रहते जनाजे़ भी अकेले होते।।।।।

 

Comments

comments

Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 5
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • 1
  •  
  •  
  •  
    6
    Shares

About the Author:

Leave A Comment