अनोखा ख्वाब घ

अनोखा ख्वाब घ

By | 2018-04-19T00:08:04+00:00 April 19th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

आज मैंने देखा एक ख्वाब है
विचित्र सा हो गया सारा जहाँ

सूर्य उतरता चांदनी के साथ है
चांद की दोस्ती दुपहरी से

उगल रहा वह एक आग है
मछलियां उड़ रही हैं पेड़ों पर

पंक्षियों का बसेरा जल में है
आंसमा हो गया है हरा भरा

रंग बिरंगे फूल खिलते नभ में है
भंवरे भंवर करते आसमानों में

तारे सितारे खिले उपवन में है
प्यार में पड़ गया है इन्द्रधनुष

तितलियाँ खेलती जल तटबंधों में
शेर जंगलों में जाकर छुपे

गीदड़ बन गया जंगल का राजा है
जहां में उल्टा जमाना आ गया

आज मैंने देखा एक ख्वाब है
विचित्र सा हो गया सारा जहाँ

                       -नीरजा शर्मा 

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