रिश्ते

रिश्ते

By | 2018-04-19T21:05:14+00:00 April 19th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

प्रेम के ये रिश्ते नाते,तोडे नहीं जाते है

मुश्किल हो चाहे जितनी,जोड़े जाते है।

रिश्ता जो तोडे माँ से

ममता याद आती है

ममता का कहना क्या

लोरी याद आती है

लोरी याद आती है ,हिलोरी याद आती हैं

थपकी को याद कर दिल झूम जाते हैं।

प्रेम के ये रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है…..

माँ की जो बात करे

दुलार याद आता है

आता है दूध याद

उपकार याद आता है

माँ के हृदय से लग कर

भूले थे अपनी पीड़ा को

तपता हुआ बदन वो मेरा

ओर बुखार याद आता है

आती है याद माँ तो ,वो लाल याद आते हैं

भेजती हे वो रण में ओर वो चले जाते हैं

प्रेम के रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है…….

रिश्ता जो तोडे भाई

भाई याद आता है

साथ साथ खेले वो

बचपन याद आता है

बचपन के वो पहलू

वो मैदान याद आते हैं

जहाँ खेले साथ साथ

वो घर द्वार याद आते हैं

मुझे याद आती है हरियाली ओर खुशहाली

गाँव के खेत खलिहान याद आते हैं ।

प्रेम के रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है……….

रिश्ता जो बहना से तोडे

राखी याद आती है

आती है याद तो

सूनी कलाई याद आती है

आती है याद बहना की सगाई की

शादी ओर प्रेम रस्म निभाई की

आती है याद विदाई ओर करुणाई की

वो आँसू मुझे अब भी याद आते हैं ।

प्रेम के रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है….

गाँव से रिश्ता टूटा ,

गाँव याद आता है

पीपल की ठंडी छाँव

ओर वो ठाओ याद आता है

वो गाँव की हरियाली याद आती है

दादी नानी की कहानी याद आती है

गाँव का वो मेला ,जो लगता था देवी मंदिर पर

उस मेले की जलेवी ओर रसमलाई याद आती है

जिनके हे टूटे रिश्ते वो जोड़ नही पाते है

वो आधे अधूरे ख्वाब बनकर रह जाते हैं

प्रेम के रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है …….

रिश्ता मैंने तोडा था ,गाँव की उस टोली से

टोली ओर गाँव की उस देहाती सी बोली से

टोली ओर गाँव की वो बोली याद आती है

आती है याद वो सुंदर सी भावजे

भावजो का वो हँसी मजाक याद आती है

गांव की सुंदर तस्वीरें ओर गाँव याद आते हैं

प्रेम के रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है……

गाँव के मंदिर की घण्टिया याद आती है

आती है याद तो करुणाई भर जाती है

सागर की लहरों सा उफान उठ जाता है

भावुक लड़की के जैसे नैन नीर भर जाता है

रिश्तों को याद करके ,दिल की पुकार सुनके

मन से आवाज आती है कि

रिश्ते मुझे सजाने है …..

प्रेम के रिश्ते नाते तोडे नहीं जाते है ….

                                     – राघव दुबे

                                        8439401034

 

 

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About the Author:

राघव दुबे पुत्र चंद्रशेखर दुबे निवासी इटावा हूँ मैं कलम का छोटा सा पुजारी हूँ ....यह महामायी की अनुकम्पा है कि में कुछ लिख पाता हूँ।

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